लक्ष्मी कश्यप (संवाददाता)
Chaitra Navratri Upay: इस वर्ष चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी के साथ-साथ देवी चंद्रघंटा की भी उपासना की जाएगी। देवी मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण ही इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। मां चंद्रघंटा की पूजा करने से सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है। वहीं सफेद वस्त्र धारण किए हुए मां ब्रह्मचारिणी के दो हाथों में से दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है। इनकी पूजा से व्यक्ति के अंदर जप-तप की शक्ति बढ़ती है। तो आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं माता ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा के निम्मित किये जाने वाले उपायों के बारे में, जिन्हें करके आप अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकते हैं।
– अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बहुत ही मेधावी, होनहार, इंटेलिजेंट और कार्यकुशल हो, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन आपको थोड़ी-सी ब्राह्मी बूटी लेकर उस पर 108 बार ये मंत्र पढ़ना चाहिए। मंत्र है- या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ यह मंत्र पढ़ने के बाद उस ब्राह्मी को अपने बच्चे को खिला दें और चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन से सात दिन तक लगातार ऐसा ही करें।
– अगर आप चाहते हैं कि आपकी संतान बहुत जल्दी तरक्की के शिखर पर पहुंच जाये, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सात दालों का चूरा बनाकर। उन पर इस मंत्र का ग्यारह सौ बार जप करें। मंत्र है- ‘या देवी सर्वभूतेशु विद्यारूपेण संस्तिथा नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः’ इसके बाद बच्चे के हाथ से स्पर्श कराकर किसी पेड़ की जड़ में रखे या चिड़िया को खिलाएं।
– अगर आपने किसी से कर्ज़ ले रखा है और बहुत कोशिशों के बाद भी वह नही उतर रहा है तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन माता की पूजा के समय सवा किलो साबुत लाल मसूर, लाल कपड़ें में बांधकर अपने सामने रख दें और फिर घी का दीपक जलाकर माता के इस मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र है- दधानां कर पद्माभ्यां अक्षमाला कमण्डलुम्। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिणीः अत्युत्तमा॥ पूजा समाप्त होने के पश्चात मसूर को अपने ऊपर से 7 बार उसार कर किसी भी सफाई कर्मचारी को दे दें।
– अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चों को उत्तम विद्या की प्राप्ति हो, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन आपको चमेली या किसी अन्य सफेद फूल के साथ ही 6 लौंग और एक कपूर लेकर देवी मां के सामने आहुति देनी चाहिए और आहुति देते समय इस मंत्र का जप करना चाहिए। मंत्र है- या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
– अगर आप जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करना चाहते हैं, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन आपको देवी ब्रह्मचारिणी के मंत्र का 11 बार जप करना चाहिए। मंत्र है- दधानां कर पद्माभ्यां अक्षमाला कमण्डलुम्। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिणीः अत्युत्तमा॥ इस प्रकार जप के बाद देवी मां को पुष्पांजलि अर्पित करें।
– अगर आप अपने ज्ञान में बढ़ोतरी करना चाहते हैं और अपनी उथल-पुथल जिंदगी में शांति पाना चाहते हैं, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन आपको मां ब्रह्मचारिणी के स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। देवी मां का स्तोत्र इस प्रकार है- तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूप धरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शङ्कर प्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
– आपके परिवार पर कभी किसी प्रकार की परेशानी न आये, इसके लिए चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन पांच गुलाब के खिले हुए फूलों को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए डेढ़ मीटर सफेद कपड़े में बांध दीजिये और इसे बहते जल में प्रवाहित कर दीजिए।
– अगर आप कर्ज से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 5 सफेद कौड़ियां लेकर, उन्हें लाल कपड़े में बांधकर देवी माँ के मंदिर में चढ़ाएं और देवी मां की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के बाद उस लाल कपड़े को उठाकर अपने साथ घर वापस ले आएं और अपनी तिजोरी में रख लें।
– अगर आप अपने जीवन में धन की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के इस मंत्र का जप करें। मंत्र इस प्रकार है- सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।
– अगर आप बेहतर स्वास्थ्य पाना चाहते हैं, तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा को एक कपूर और 6 लौंग अर्पित करें। साथ ही दुर्गा जी के मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र है- देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।|
– अगर आप स्टूडेंट हैं और अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन आपको अपनी मेहनत के हिसाब से परिणाम नहीं मिल रहे हैं तो चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन दुर्गा मां को पुष्पांजलि देने के बाद इस मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र है- या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। साथ ही 2 कपूर की टिकिया और 12 लौंग देवी मां को चढ़ाएं।