विनीत माहेश्वरी (संवाददाता )
दुनिया के कई देश भारतीय लड़ाकू विमान तेजस के दीवाने हो गए हैं। कई देशों ने भारत के लड़ाकू
विमान तेजस को खरीदने की इच्छा जताई है। तेजस पर बाकायदा बातचीत के लिए विदेश मंत्री एस
जयशंकर ने अर्जेंटीना की दो दिवसीय यात्रा की थी। भारतीय लड़ाकू विमान तेजस की दुनिया में मांग
के पीछे दो बड़ी वजह हैं इसका चीन और पाकिस्तान के जेएफ-17 से ज्यादा ताकतवर और
इंपेक्टफुल होना। दूसरा तेजस दुनिया के अन्य लड़ाकू विमानों से कीमत में भी सस्ता है। अर्जेंटीना के
अलावा हाल ही के दिनों में मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस सहित कई देशों ने तेजस विमान को
खरीदने में रुचि दिखाई है। तेजस पर ऐसे ही इतना भरोसा नहीं है। दरअसल, भारतीय वायु सेना के
लिए तेजस लड़ाकू विमान बेहद अहम है। एलएसी और एलओसी पर चीन और पाकिस्तान के खिलाफ
दोहरी चुनौती में वायुसेना के लिए तेजस बड़ा और घातक हथियार है। चीन और पाक भी इस बात
को अच्छी तरह से समझते हैं। हालांकि वो तेजस के मुकाबले अपने जेएफ-17 लड़ाकू विमान का दंभ
भरते हैं। तेजस को भारत ने स्वनिर्मित किया है जबकि, जेएफ-17 को चीन और पाकिस्तान ने
संयुक्त रूप से बनाया है। जेएफ-17 के मुकाबले तेजस काफी हल्का और तेज है। इसमें जेएफ-17 से
ज्यादा पावरफुल इंजन भी लगा है। इसकी पेलोड क्षमता भी ज्यादा है। इसके अलावा तेजस को नेवी
की जरूरत के हिसाब से मॉडिफाई भी किया गया है। यही कारण है कि तेजस चीन और पाक के
जेएफ-17 से ज्यादा अत्याधुनिक और ज्यादा क्षमता वाला लड़ाकू विमान है। तेजस की कीमत दुनिया
के अन्य लड़ाकू विमानों की तुलना में काफी कम है। जबकि ताकत और बहादुरी के मामले में वह
दूसरे लड़ाकू विमानों पर भारी है। तेजस का निर्माण हल्के कॉम्बेड एयरक्राफ्ट के तौर पर किया गया
है जो समय के साथ लगातार अपडेट किया जाता रहता है। तेजस डिफेंस के कम बजट वाले देशों के
लिए संजीवनी है। तेजस का एक रिकॉर्ड यह भी है कि यह लड़ाकू विमान कभी किसी हादसे का
शिकार नहीं हुआ। हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ा है। रक्षा
उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक अमेरिका भी पूरी तरह भारत में विकसित इस लड़ाकू विमान में
रुचि ले रहा है। अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलिपींस सहित छह देश तेजस की खरीद के
लिए आगे आए हैं। मलेशिया तो पहले ही इस विमान को खरीदने के लिए प्रस्ताव रख चुका है। देश
की आजादी के बाद कई क्षेत्रों में बड़े काम हुए, लेकिन रक्षा क्षेत्र एक तरह से उपेक्षित ही रहा। लंबे
समय तक भारत रक्षा उपकरणों और छोटे-छोटे जरूरी सामान के लिए दूसरे देशों का ही मुंह ताकता
रहा। कुछ साल पहले तक भी भारत रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाले लगभग ज्यादातर उत्पाद, हथियार
और उपकरण विदेशों से खरीदे जाते रहे। यही कारण रहा कि भारत पूरे विश्व में रक्षा उपकरणों का
सबसे बड़ा आयातक देश बना रहा। पर अब हालात बदल रहे हैं। आज दक्षिण पूर्व एशिया में भारत
का दबदबा बढ़ रहा है। हथियार निर्यात से न केवल देश की आय बढी है, बल्कि फिलिपींस के बाद
वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी भारत से हथियार खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। जाहिर
है, ऐसे में हर देश के लिए सैन्य ताकत बढ़ाना वक्त की जरूरत बनता जा रहा है और संयोग से यह
अवसर भारत को मिल रहा है।