जींद में 142 छात्राओं से छेड़छाड़ करने वाला स्कूल प्रिंसिपल बर्खास्त, चिट्ठी से खुला था राज

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छेड़छाड़ के मामले में...- India TV Hindi

प्रियंका कुमारी(संवाददाता)

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जींद (हरियाणा): जींद के उचाना मंडी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 142 छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले में हरियाणा सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सस्पेंड आरोपी प्राचार्य करतार सिंह को बर्खास्त कर दिया गया है। हरियाणा सरकार के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि विभागीय जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को प्राचार्य के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई को मंजूरी दी। प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 311 (बी) के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कार्रवाई की है।

जांच के लिए SIT का गठन

उनके अनुसार, एसडीओ (सी) उचाना द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई छात्राओं ने प्राचार्य के खिलाफ दुर्व्यवहार के बयान दिए हैं। प्रवक्ता के अनुसार, मामले की गंभीरता और प्राचार्य के खिलाफ आरोपों को देखते हुए बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। संबंधित स्कूल में महिला प्राचार्य और 16 नए विभागीय कर्मियों की नियुक्ति की गई है। फिलहाल आरोपी प्रिंसिपल को सस्पेंड करने के बाद गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा हुआ है। मामले की गहनता से जांच के लिए SIT का गठन किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि उचाना के एक सरकारी स्कूल की छात्राओं ने महिला आयोग दिल्ली, राज्यपाल, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अगस्त महीने में चार पेज का शिकायत पत्र भेजा था। इसमें छात्राओं ने स्कूल प्राचार्य करतार सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया था कि प्राचार्य छात्राओं को अपने ऑफिस में बुला कर छेड़छाड़ करता है। उसने कार्यालय पर काला शीशा लगवा रखा है, जिसमें से अंदर से बाहर साफ दिखाई देता है लेकिन बाहर की तरफ से कुछ नहीं दिखता। प्राचार्य को जो भी छात्रा पसंद आती, उसे अपने ऑफिस में बुलाकर उसे फेल करने, प्रेक्टिकल में कम नंबर लगाने, बदनाम करने का डर दिखाकर उनके साथ छेड़छाड़ करता।

कई छात्राओं ने प्राचार्य के शोषण से तंग आकर स्कूल तक छोड़ दिया था। स्कूल में दूसरे स्टाफ को भी प्राचार्य की गंदी हरकतों से अवगत करवाया गया लेकिन किसी ने भी मामले में हस्तक्षेप नहीं किया था। मामले को कई दिनों तक दबाकर रखा गया। आखिरकार शिकायत पत्र उजागर हुआ और शिक्षा विभाग ने इस पर संज्ञान लेते हुए प्राचार्य को सस्पेंड कर दिया।

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