कोटा में अब रूकेंगे सुसाइड के मामले! सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए जारी किए सख्त दिशानिर्देश

Rajasthan- India TV Hindi

प्रियंका कुमारी(सवांददाता)

कोटा में छात्रों के सुसाइड मामलों को सरकार गंभीरता ले रही है। सुसाइड के बढ़ते मामलों को लेकर राजस्थान सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए एक जरूरी दिशानिर्देश जारी किए हैं। साथ ही इस समस्या से निपटने के लिए बनाई गई एक हाई लेवल कमेटी भी गठित की है। कमेटी ने हाल ही में छात्रों में बढ़ते तनाव, मानसिक दवाब और आत्महत्याओं के पीछे की वजहों को लेकर कोचिंग संस्थानों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। गाइडलाइन में कमेटी ने छात्रों के साथ-साथ हर 3 महीने में माता-पिता की भी काउंसलिंग क्लासेस लगाने को कहा है।

आत्महत्याओं के पीछे ये 6 बड़े कारण

कमेटी के मुताबिक, छात्रों में बढ़ते तनाव और आत्महत्याओं के पीछे ये 6 बड़े कारण है। पहला प्रतियोगी परीक्षा में काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धा और सफलता की सीमित संभावना, सिलेबस और टेस्ट पेपर काफी कठिन होने की वजह से कोचिंग संस्थानों के छात्रों में उत्पन्न मानसिक दबाव एवं निराशा। दूसरा ये कि बच्चों की योग्यता, रूचि व क्षमता से अधिक उन पर पढ़ाई का बोझ एवं पैरेंट्स की बड़ी-बड़ी उम्मीदें। तीसरा कि कम उम्र में व्यवहार में बदलाव, फैमिली से दूर रहना, सही काउंसलिंग एवं शिकायत निवारण तंत्र की कमी। चौथा कि असेसमेंट टेस्ट्स का ज्यादा होना और रिजल्ट सार्वजनिक करना, छात्रों के नंबर कम होने पर टिप्पणी करना और रिजल्ट के आधार पर कोचिंग संस्थानों द्वारा बैच सेग्रिगेशन। पांचवां कि कोचिंग संस्थानों का काफी बिजी शेड्यूल और बड़ा सिलेबस होना। छठा व अंतिम ये कि पढ़ाई के दौरान छुट्टियों का न होना, मोनोटोनस माहौल और सह-शैक्षणिक गतिविधियों का अभाव रहना

कोचिंग संस्थानों के लिए गाइडलाइन

इन सभी कारणों को देखते हुए सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं जो निम्न हैं-

a. छात्रों को 9वीं क्लास से पहले कोचिंग में एडमिशन लेने का प्रोत्साहित न करें, अगर 9वीं कक्षा से पहले कोई छात्र कोचिंग छोड़ना चाहे तो उसे रोके नहीं और बाकी बची फीस वापस कर दें। छात्र को एडमिशन स्क्रीनिंग टेस्ट और काउंसलिंग के माध्यम से उसके इंटरेस्ट समझने के बाद ही दें। साथ ही माता-पिता की भी काउंसलिंग करें। एडमिशन के बाद समय-समय पर मां-बाप को बच्चे की प्रोग्रेस के बारे में बताते रहें

b. असेस्टेंट टेस्ट व बैच सेग्रिगेशन- कोचिंग संस्थान छात्रों के टेस्ट रिजल्ट सार्वजनिक न करें, रिजल्ट की गोपनीय रखते हुए अपने लेवल पर एनालिसिस करें, जो बच्चा कम नंबर ला रहा हो या एकेडमिक परफॉर्मेंस कम हो रही है तो उनकी काउंसलिंग लें। असेसमेंट टेस्ट के आधार पर बैचों का सेग्रिगेशन बिल्कुल न करें।

c. गेट-कीपर ट्रेनिंग एवं निगरानी सिस्टम- कोचिंग संस्थान अपने संचालकों, शिक्षकों समेत सभी स्टाफ की WHO द्वारा गेट-कीपर ट्रेनिंग करवाएं। इसके अलावा छात्रों से बातचीत स्थापित करें।

d. साइकेट्रिस्ट एवं काउंसलर्स की नियुक्ति हो।

e. छुट्टी एवं सह सह-शैक्षणिक गतिविधियां हो ।

f. इजी-एग्जिट ऑप्शन एवं फीस रिफंज पॉलिसी रखी जाए।

g. टेली-मानस एवं अन्य टोल फ्री हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार-प्रसार: छात्रों के बीच टेली-मानस के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800894416, 14416 अनिवार्य रूप से साझा किया जाए।

h. कोड ऑफ कंडक्ट- कोचिंग संस्थान के मैनेजमेंट, शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ के लिए जरूरी गाइडलाइंस

हॉस्टल/पीजी संचालकों के लिए भी दिशानिर्देश

इतना ही नहीं सरकार ने हॉस्टल/पीजी संचालकों के लिए भी कुछ जरूरी दिशानिर्देश जारी किए हैं जो नीचे आप पढ़ सकते हैं-

सरकार की गाइडलान में कहा गया कि क्षमता से अधिक बच्चों को न रखा जाए, पीजी या हॉस्टल छोड़ने पर बची अवधि का किराया एवं मेस चार्ज माह के आधार पर वापस किए जाएं।

इसके साथ ही एंट्री-एग्जिट गेट पर हेल्पलाइन नंबर लिखा जाए, CCTV कैमरे लगाए जाएं। किसी भी हॉस्टल या पीजी में छात्राओं की निजिता का हनन न हो। हॉस्टल व पीजी में सुझाव या शिकायत बॉक्स लगाया जाए और जिला प्रशासन द्वारा स्थापित ई-कंपलेंट पोटर्ल की जानकारी बताई जाए। रोजाना छात्रों की बायोमेट्रिक और फिजिकल अटेंडेंस लेनी होगी। लड़कियों के हॉस्टल में केवल महिला वार्डन की ही नियुक्ति की जाए आदि।

जानें पूरा मामला 

कोटा से लगातार सामने आ रही छात्र आत्महत्या की खबरों के बाद, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने 18 अगस्त को कोचिंग संचालकों के साथ बात की और इसका समाधान निकालने के लिए 24 अगस्त को एक हाई लेवल कमेटी बनाई। इस कमेटी की जिम्मा शासन सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा को दिया गया। इसके बाद कमेटी ने अलग-अलग विभाग, स्टेक होल्डर्स व कोचिंग स्टूडेंट्स, अभिभावको, कोचिंग संचालकों, डॉक्टर्स, हॉस्टल/पीजी संचालक, विभिन्न जिलों के प्रशासनिक अधिकारी, एनएचएम टीम, टीचर्स आदि से बातचीत की और उनके सुझाव का गहन अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट तैयार किया। इसी रिपोर्ट को राजस्थान सरकार स्वीकार कर लिया है। यही गाइडलाइन सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जारी की है।

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