जिस चांद पर पहुंचा भारत का चंद्रयान-3, उसे परमाणु बम से उड़ाना चाहता था अमेरिका

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चंद्रमा की प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi

प्रियंका कुमारी(संवाददाता)

आज जिस चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करके भारत ने दुनिया में नया कीर्तिमान रचा है, उसी चांद को कभी अमेरिका परमाणु बम से उड़ाना चाहता था। यह सुनकर अब को हैरानी हो रही होगी, मगर कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में अमेरिका के इस सीक्रेट प्लान का खुलासा किया गया है। अमेरिका चांद पर शक्तिशाली परमाणु बम विस्फोट की पूरी तैयारी कर चुका था। वह अपने प्लान को चांद पर अंजाम देने वाला था। मगर अमेरिकी सेना ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। अन्यथा परमाणु बह विस्फोट होने के बाद चांद की क्या हालत होती यह कोई नहीं जान सकता था। अमेरिका सेना ने ये कहकर नासा को परमाणु बम विस्फोट करने से रोका था कि इससे संपूर्ण मानवता का विनाश हो सकता है। आइए अब आपको बताते हैं कि चांद को परमाणु बम से उड़ाने का अमेरिका का वह प्लान क्या था और इससे वह क्या हासिल करना चाहता था?

अमेरिका के इस खौफनाक प्लान की कहानी 73 वर्ष पुरानी है। उस दौरान पूर्व सोवियत संघ और अमेरिका के बीच भयंकर प्रतिद्वंदिता चल रही थी। यानि अमेरिका और रूस में भीषण अंतरिक्ष युद्ध छिड़ा हुआ था। अमेरिका और सोवियत संघ में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ मची थी। इससे पहले पूर्व सोवियत संघ अपना पहला चांद मिशन लांच कर चुका था। रूस को डराने और यह जताने के लिए कि अमेरिका की क्षमता अंतरिक्ष में उससे कहीं ज्यादा है, इसलिए वह चांद को न्यूक्लियर विस्फोट में उड़ाना चाहता था। वर्ष 1950 में इसके लिए अमेरिका ने बेहद सीक्रेट प्लान तैयार किया था। इससे पूरी मानवता के अस्तित्व को खतरा हो सकता था। अमेरिकी सेना द्वारा अलर्ट किए जाने के बाद अमेरिका ने यह प्लान रद्द कर दिया था।

जापान पर गिराए परमाणु बम से अधिक खतरनाक विस्फोट करना चाहता था अमेरिका

चांद पर अमेरिका इतना घातक और खतरनाक विस्फोट करना चाहता था, जो जापान पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गिराए गए परमाणु बमों से भी ज्यादा खतरनाक था। इसके लिए अमेरिका ने हाईड्रोजन बम से चांद पर विस्फोट करने की योजना बनाई थी। हाईड्रोजन बम परमाणु बमों से काफी ज्यादा खतरनाक और भयावह परिणाम देने वाले होते हैं। इस प्लान के पीछे अमेरिका का मकसद रूस को हैसियत दिखाने के साथ चांद पर रिसर्च करना भी था। चांद पर विस्फोट होने के बाद उससे निकलने वाली गैस, मिट्टी और धूल का परीक्षण करना भी अमेरिकी सीक्रेट प्लान का हिस्सा था। मगर न्यूक्लियर विस्फोट के भयावह परिणाम होने की आशंका अमेरिका सेना द्वारा जाहिर किए जाने पर इस योजना को रद्द करना पड़ा। इस सीक्रेट मिशन को अमेरिका ने ए119 नाम दिया था।

गुप्त मिशन में शामिल एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने ही कर दिया खुलासा

अमेरिका के इस खतरनाम मिशन का खुलासा इसमें शामिल एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने ही कर दिया था। यह खुलासा दुनिया के सामने सबसे पहले 1990 में सामने आया था। तब इससे पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया था। अमेरिकी वैज्ञानिक कार्ल सेगन ने खुलासा किया था कि अमेरिका चांद पर न्यूक्लियर बम विस्फोट करना चाहता था। योजना यह थी कि वह चांद पर उस जगह पर विस्फोट करेगा, जहां से अमेरिका का आधे हिस्से में अंधेरा और आधे में उजाला रहता है। इससे बेहद तेज चमक पैदा होने की संभावना था, मकसद था कि यूएसए की ताकत को रूस समेत पूरी दुनिया धरती से इस बम विस्फोट और चमक के जरिये महसूस कर सके। अमेरिका इसके बाद कृत्रिम चंद्रमा बनाने के मिशन पर भी काम कर रहा था।

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