Masik Krishna Janmashtami 2023: सावन महीने में कब है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी? जानें-शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Janmashtami 2021 Mantra श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर करें इन मंत्रों का जाप  पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं - Chant these Janmashtami 2021 Mantra all wishes  will be fulfilled

प्रिया कश्यप (सवांददाता)

Masik Krishna Janmashtami 2023 सनातन धर्म शास्त्रों में निहित है कि जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादों महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ है। अतः हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा-उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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Masik Krishna Janmashtami 2023: हिन्दू पंचांग के अनुसार, 9  जुलाई को सावन महीने की कृष्ण जन्माष्टमी है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण एवं श्री राधा रानी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त व्रत-उपवास रखा जाता है। धर्म शास्त्रों में निहित है कि जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादों महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ है। अतः हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा-उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही भगवान कृष्ण और राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानते हैं-

शुभ मुहूर्त

दैनिक पंचांग के अनुसार, सावन महीने के अष्टमी की तिथि 09 जुलाई को संध्याकाल 07 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 10 जुलाई को 06 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में हुआ है। अतः 9 जुलाई को सावन महीने की जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

पूजा विधि

सावन महीने की जन्माष्टमी यानी 9 जुलाई को ब्रह्म बेला में उठें और जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को प्रणाम कर दिन की शुरुआत करें। अब घर की साफ-सफाई करें। साथ ही अन्य दैनिक कार्यों को संपन्न कर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। इस समय हथेली में जल रखकर आचमन करें और पीले रंग का नवीन वस्त्र धारण करें। इसके पश्चात, भगवान भास्कर को जल में रोली या कुमकुम मिलाकर अर्घ्य दें। तदोउपरांत, पूजा गृह में एक चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मुरली मनोहर और श्रीजी की प्रतिमा स्थापित करें।

अब पंचोपचार कर भगवान कृष्ण और राधा रानी की विधिवत पूजा करें। इस समय जल या दूध में केसर मिलाकर अर्घ्य दें। साथ ही पीले रंग के फल एवं पुष्प अर्पित करें। भगवान को भोग में माखन, मिश्री, दूध, दही और श्रीखंड अर्पित करें। पूजा के समय कृष्ण चालीसा और राधा कवच का पाठ करें। आप भगवान कृष्ण और राधा रानी को प्रसन्न करने हेतु भजन भी गा सकते हैं। अंत में विधि पूर्वक आरती करें। इस समय भगवान से सुख, समृद्धि, शांति एवं भक्ति की कामना करें। दिनभर उपवास रख निशा काल में 12 बजे के बाद आरती- अर्चना कर फलाहार करें। अगले दिन पूजा-पाठ संपन्न कर व्रत खोलें।

 

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