गजनवी, ऐबक और हुमायूं भी नहीं जीत पाए यह किला; इस बादशाह ने तो लड़ते हुए गंवाई जान

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देश के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है ग्वालियर का किला - gwalior fort played  an important role in indian history - AajTak

विनीत महेश्वरी (संवाददाता)

कालिंजर किला…. जिसे अजेय दुर्ग माना जाता था। गजनवी ऐबक और हुमायूं ने भी किले पर कब्जा करने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं पाए। एक बादशाह की तो लड़ाई में मौत भी हो गई थी। आइए कालिंजर किले के बारे में विस्तार से जानते हैं…

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में स्थित कालिंजर किला पिछली कई सदियों से भारत के बदलते सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य का साक्षी रहा है। यह किला अपनी अद्वितीय शक्ति के लिए जाना जाता था। कहा जाता है कि सिकंदर ने इसकी तुलना चीन की महान दीवार से की थी।

कालिंजर किले में हुई शेरशाह सूरी की मौत

कालिंजर किले को फतह करने के लिए कितने राजा आए, इसका कोई हिसाब नहीं है। इनमें से एक राजा शेरशाह सूरी भी था, जो एक महान शासक, महान प्रशासक और महान योद्धा था। इस किले की ताकत इसकी दीवारों में थी, लेकिन इन दीवारों ने ही शेरशाह को मार डाला।

शेरशाह सूरी की मौत कैसे हुई?

बात है सन 1544 की… उस समय राजा कीरत सिंह कालिंजर के राजा थे। शेरशाह ने किले पर कब्जा करने के इरादे से आक्रमण कर दिया। उसने किले को घेरा लिया, वह इसे जीत नहीं पाया। कालिंजर युद्ध छह महीने तक चला। जब शेरशाह ने देखा कि जीत आसानी से नहीं मिलेगी तो उसने किले के करीब एक ऊंची मीनार बनाने का फैसला किया। यह मीनार इतनी ऊंची थी कि ऊपर से किले का आंतरिक भाग आसानी से देखा जा सकता था।

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