छत्तीसगढ़ के इस मंदिर में नारी स्वरूप में मिलते हैं हनुमान, पूरी करते हैं हर मनोकामना

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एक ऐसा हनुमान मंदिर जहाँ हनुमान जी करते भक्तों की मनोकामना पूरी,पर सीधे  नहीं उलटे स्वरुप में

विनीत माहेश्वरी (संवाददाता)

देश में ऐसे बहुत से मंदिर हैं जहां हनुमान जी की अलग-अलग रूपों में पूजा होती है। रामेश्वर में स्थापित मंदिर में पंचमुखी हनुमान के रूप में तो वहीं दूसरी ओर राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में हनुमान जी का बालाजी के रूप में पूजन होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ के रतनपुर गांव में एक ऐसा मंदिर मौजूद है जहां हनुमान जी की पूजा नारी के रूप में की जाती है।

क्या है मान्यता

शास्त्रों में हनुमान जी का वर्णन बाल ब्रह्मचारी के रूप में मिलता है। छत्तीसगढ़ का यह गिरिजाबंध मंदिर इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ संकटमोचन हनुमान पुरुष नहीं स्त्री के रूप में विरजनमान हैं। इस मंदिर के इतिहास की बात करें तो यह मंदिर कई हजार वर्षों पुराना है। इस मंदिर के प्रति भक्तों में काफी आस्था है। ऐसा माना जाता है कि जो भी यहां दर्शन के लिए आता है वह यहां से निराश या खाली हाथ वापस नहीं जाता है।

मंदिर के पीछे की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण हनुमान जी के भक्त रतनपुर के राजा पृथ्वी देवजू ने लगभग दस हजार वर्ष पहले करवाया था। उस राजा को कोढ़ की बीमारी थी जिसके कारण वह बहुत परेशान रहता था। एक दिन सपने में हनुमान जी ने उसे दर्शन दिए। लेकिन राजा के सपने में हनुमान जी स्त्री के रूप में थे। हनुमान जी का रूप देवी सा था लेकिन लंगूर जैसी पूँछ भी थी। उन्होंने कानों में कुंडल और माथे पर मुकुट पहना हुआ था। हनुमान जी के एक में लड्डू से भरी थाली थी और दूसरे हाथ में राम मुद्रा अंकित थी। सपने में हनुमान जी ने राजा से कहा कि, “मैं तेरी भक्ति से प्रसन्न हूँ। तेरा कष्ट अवश्य दूर होगा।” भगवान ने उन्हें सपने में मंदिर बनवाने का आदेश भी दिया। साथ ही  राजा से यह भी कहा कि, “मंदिर के पीछे तालाब खुदवाकर उसमें स्नान करने से तेरा रोग दूर हो जाएगा।”

कहां से आई मंदिर की मूर्ति

हनुमान जी के आदेश से राजा ने मंदिर का निर्माण शुरू करवाया। जब मंदिर का काम पूरा होने वाले था तब यह प्रश्न खड़ा हुआ कि मंदिर में स्थापना के लिए मूर्ति कहाँ से लाई जाए। उस रात राजा के सपने में फिर से हनुमान जी आए और कहा कि, “महामाया कुंड में मेरी मूर्ति रखी हुई है। तू कुंड से मूर्ति निकाल कर मंदिर में स्थापित कर दे।” राजा ने हनुमान जी के निर्देशों का पालन करते हुए और महामाया कुंड से मूर्ति निकालवाई। कुंड से निकाली गई मूर्ति में हनुमान जी का स्वरुप स्त्री जैसा था। वह मूर्ती बिलकुल वैसी थी जैसा स्वरूप राजा ने सपने में देखा था। राजा ने पूरे विधि-विधान से मंदिर में मूर्ति की स्थापना करवाई। इसके बाद राजा की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई। उसी दिन से इस मंदिर में हनुमान जी के स्त्री स्वरूप की पूजा होती है। इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति का श्रृंगार महिलाओं की तरह किया जाता है और जेवर भी पहनाए जाते हैं।

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