भारत-मध्य एशियाई देशों की बैठक में आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान

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एनएसए की भारत-मध्य एशिया बैठक ने आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई  का आह्वान किया - खबर सुनो

विनीत माहेश्वरी (संवाददाता) 

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नई दिल्ली, 06 दिसंबर  भारत और मध्य एशियाई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों
(एनएसए) ने मंगलवार को आतंकवाद के वित्तपोषण, चरमपंथ तथा सीमापार आतंकवाद के लिए छद्म
आतंकियों के इस्तेमाल जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई की जरूरत बताई।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान को आतंकवादी गतिविधियों के लिए सुरक्षित
पनाहगाह नहीं बनने देना चाहिए।
एनएसए अजीत डोभाल की मेजबानी में हुई बैठक में अफगानिस्तान की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय
अखंडता का सम्मान करने की जरूरत पर जोर दिया गया तथा उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप
नहीं करने का आग्रह किया गया।
एक संयुक्त बयान में कहा गया कि अधिकारी इस बात के लिए तैयार हो गये कि आतंकवादियों के
दुष्प्रचार, भर्ती और धन उगाही की कोशिशों के विस्तार के क्षेत्र के लिए गंभीर सुरक्षा प्रभाव हो सकते
हैं और इसलिए सामूहिक तथा समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
इसमें कहा गया, ‘‘नई और उभरती प्रौद्योगिकियों का दुरुपयोग, हथियारों और नशीले पदार्थों की
तस्करी, सीमा पार आतंकवाद के लिए छद्म आतंकियों का उपयोग, दुष्प्रचार फैलाने के लिए साइबर
जगत का दुरुपयोग तथा मानव रहित हवाई प्रणालियां आतंकवाद निरोधक प्रयासों में नई चुनौतियां
पेश करती हैं और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित करती हैं।’’
बयान में सीमापार आतंकवाद के उल्लेख को भारत पर निशाना साधने वाले विभिन्न आतंकी समूहों
को पाकिस्तान के समर्थन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
बैठक में आतंकवाद की समस्या से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के
समग्र समझौते को जल्दी अपनाने की पुरजोर वकालत की गयी।
इसमें इस बात को भी दोहराया गया कि अच्छा संपर्क व्यापार तथा वाणिज्य को बढ़ाने में कारगर हो
सकता है तथा भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच करीबी संवाद सुनिश्चित करने में भी सहायक
हो सकता है।
चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के परोक्ष संदर्भ में बयान में कहा गया, ‘‘वे इस बात पर सहमत
हुए कि संपर्क की पहल पारदर्शिता, व्यापक सहभागिता, स्थानीय प्राथमिकताओं, सभी देशों के लिए
वित्तीय मजबूती तथा संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित होनी
चाहिए।’’

बैठक के प्रारंभिक उद्बोधन में डोभाल ने कहा कि वित्तीय समर्थन आतंकवाद का आधारस्तंभ है और
देश में आतंकवाद के वित्तपोषण को (रोकने को) अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मध्य एशिया को भारत का ‘विस्तारित पड़ोस’ बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि नई
दिल्ली इस क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और अफगानिस्तान हम सभी के लिए महत्वपूर्ण
मुद्दा है।
डोभाल ने अफगानिस्तान समेत क्षेत्र में आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा
रूपरेखा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करने के विचार के साथ बैठक की मेजबानी की। इसमें जनवरी
में हुई पहली भारत-मध्य एशिया शिखर वार्ता में लिये गये फैसले के अनुरूप व्यापक सुरक्षा को
मजबूत करने के तरीकों पर भी ध्यान दिया गया।
जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तान मूल के आतंकवादी समूहों की और अन्य की
आतंकवादी गतिविधियों के लिए अफगानिस्तान की धरती के इस्तेमाल पर भारत की बढ़ती चिंता के
बीच उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद का वित्तपोषण उसके लिए आधारस्तंभ की तरह है और आतंकवाद के
वित्तपोषण को रोकना हम सभी की समान प्राथमिकता होनी चाहिए।’’
बैठक में कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के एनएसए भाग ले रहे हैं, वहीं
तुर्कमेनिस्तान का प्रतिनिधित्व भारत में उसके राजदूत कर रहे हैं।

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