सलीम-जावेद का बड़ा प्रशंसक हूं, ‘शोले’ बड़ी प्रेरक रही है: ‘आरआरआर’ विजयेंद्र प्रसाद

सलीम-जावेद का बड़ा प्रशंसक हूं, 'शोले' बड़ी प्रेरक रही है: 'आरआरआर' विजयेंद्र  प्रसाद |

विनीत माहेश्वरी (संवाददाता )

पणजी, 22 नवंबर ‘आरआरआर’ के पटकथा लेखक वी. विजयेंद्र प्रसाद का कहना है कि
उन्होंने सलीम-जावेद की फिल्म ‘शोले’ को बार-बार देखकर पटकथा लेखन की कला का हुनर सीखा
है। तेलुगु सिनेमा के 80 वर्षीय पटकथा लेखक ने कहा कि उन्होंने अपने लेखन का सफर 40 साल
से अधिक उम्र होने के बाद शुरू किया। वह भारतीय फिल्म जगत के कामयाब और मुनाफा देने वाले
लेखक माने जाते हैं। उन्होंने “मगधीरा’, ‘मेर्सल’ ‘बजरंगी भाईजान’ और “बाहुबली’ जैसी कामयाब
फिल्मों की पटकथा लिखी है।
प्रसाद ने कहा, “मैंने 1988-1989 में लेखन का कार्य शुरू किया। मेरी उम्र 40 साल से ज्यादा थी
और मेरे पास पटकथा सीखने या स्कूल जाने का वक्त नहीं था। तो मैंने एक शॉर्टकट तलाशा।” प्रसाद
ने 1980 के दशक के अंत में सलीम खान और जावेद अख्तर द्वारा लिखित फिल्म ‘शोले’ देखी और
तब से ही यह फिल्म उनके लिए एक संदर्भ पुस्तिका का काम कर रही है। उन्होंने कहा, “मैं सलीम-
जावेद का बड़ा प्रशंसक हूं। मैंने ‘शोले’ देखी। मैंने फिल्म का कैसेट उधार लिया और बार-बार फिल्म
देखी।” प्रसाद के मुताबिक, “मैंने सीखा कि कैसे उन्होंने पात्रों को गढ़ा और उन्हें भावनाओं से जोड़ा…
आज भी मुझे लेखन में कोई परेशानी आती है तो मैं ‘शोले’ के दो -तीन दृश्य देख लेता हूं।” शोले
फिल्म 1975 में आई थी।
प्रसाद 53वें भारत अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में यहां ‘द मास्टर्स राइटिंग सत्र’ में
बोल रहे थे। एनटी रामा राव की 1957 में आई ‘मायाबाज़ार’ फिल्म ने भी प्रसाद की फिल्मोग्राफी को
प्रभावित किया है। लेखक का कहना है, “उस फिल्म में सबकुछ बेहतरीन था। एक शॉट भी ज़ाया
नहीं किया गया।” उनकी कामयाबी का राज़ पूछे जाने पर प्रसाद ने कहा कि उनका मानना है कि एक
फिल्म लेखक के तौर पर फिल्म टीम और दर्शकों की जरूरतों को पूरा करना जरूरी है। उन्होंने कहा,
“मैं लिखता नहीं हूं। मैं कहानी बोलता हूं। सबकुछ-कहानी का प्रवाह, चरित्र और मोड़- मेरे दिमाग में
होता है।” पटकथा लेखक के अनुसार, कोई नई कहानी नहीं है और एक कहानीकार को इतिहास,
संस्कृति और वास्तविक जीवन की घटनाओं से नए विमर्श निकालने होते हैं। उन्होंने चुटकी ली, ‘मैं
कहानियां नहीं लिखता, मैं कहानियां चुराता हूं।’

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