जजों की नियुक्ति करेगी सरकार?

Advertisement

चीफ जस्टिस यूयू ललित की अगुआई में कॉलेजियम की पहली बैठक, तीन HC में 18 जजों  की नियुक्ति की सिफारिश - supreme court collegium approves 18 names for  appointment as judges in

विनीत माहेश्वरी (संवाददाता)

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच पिछले
कई सालों से तल्खी देखने को ‎मिल रही है। केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने न्यायपालिका पर
सीधा हमला कर दिया। जनता के ‎लिये न्यायपालिका से कुछ नहीं है। संविधान के अनुसार जजों की
नियुक्ति करने का अधिकार सरकार को होना चाहिए। एक माह में दूसरी बार कानून मंत्री ने
कॉलेजियम सिस्टम को बदलने की बात कही है। पिछले वर्षों में हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट जिस तरह
से सरकार के दबाव में दिख रही है। उसके बाद अब यह स्पष्ट रूप से देखने लगा है कि सरकार
जल्द ही कानून बनाकर हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के जजों की नियुक्ति का अधिकार अपने हाथ में ले
लेगी।
हाल ही में प्रधान न्यायधीश और 4 जजों वाले सुप्रीम कोर्ट की काले‎ज्मि की बैठक में 2 सदस्यों की
असहमति होने के बाद सरकार का पक्ष मजबूत होने लगा है। पिछले वर्षों में कॉलेजियम की अनुशंसा
का पालन करने में सरकार ने पूरी तरह से कोताही बरती है। उन्हीं जजों को सरकार ने नियुक्त किया
है, जिन्हें सरकार चाहती थी। कॉलेजियम ने यदि सरकार की इच्छा के विपरीत किसी ऐसे जज की
नियुक्ति की सिफारिश की। उस सिफारिश को सरकार ने कभी भी नहीं माना। ऐसी स्थिति में यदि
सरकार जजों की नियुक्ति का मामला अपने हाथ में ले भी ले तो न्याय पा‎लिका की वर्तमान ‎स्थिति
में कोई ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है। उल्टे न्यायपा‎लिका की ‎विश्वसनीयता जरुर कम होगी।
न्यायपालिका खुद अपनी समीक्षा करें। 2014 के पहले न्यायपालिका के निर्णय काफी हद तक दोनों
पक्षों को प्रभावित करते थे। पिछले कुछ वर्षों से न्यायपालिका निर्णय कम दे रही है, सलाह ज्यादा दे
रही है। जनहित याचिकाओं में जुर्माना लगाना बहुत जरूरी याचिकाओं पर सुनवाई ना होना हाईकोर्ट
और सुप्रीमकोर्ट में सरकार और अन्य पक्ष को अलग अलग तरीके से देखना न्यायपालिका की
कमजोरी है। पिछले वर्षों में न्यायपालिका की जो आलोचना जनसामान्य के बीच में हो रही है। 70
वर्षों के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ, जिस तरह से सरकार ने सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट के जजों
की ‎निष्पक्षता को प्रभा‎वित करने का काम किया है। न्यायपालिका भी सरकार के दबाव में काम करते

हुए नजर आई है। उसके बाद यदि सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति करें, तो
भी कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। न्यायपालिका और सरकार के अधिकार को लेकर लगातार सरकार
हमले करती रही है। संविधान की बात करें तो संविधान के संरक्षण की जिम्मेदारी न्यायपालिका की
है। कार्यपालिका और विधायिका पर न्यायपालिका का अंकुश संविधान निर्माताओं ने लगाया हुआ है।
संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत जो मौलिक अधिकार वर्णित हैं। उन अधिकारों का हनन करने
वाले कानून एवं ‎नियम बनाने का अधिकार विधायिका के पास नहीं है। यह सही है, कि विधायिका
को कानून बनाने की शक्तियां हैं। लेकिन उनकी समीक्षा करने सं‎िवधान में व‎र्णित मौ‎लिक अ‎धिकारों
के संरक्षण का अधिकार हमेशा न्यायपालिका के पास है। न्यायपालिका के आदेशों को मानना
विधायिका और कार्यपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारी है। समय के साथ आदमी का मनोबल बनता
और बिगड़ता है। न्याय पालिका में जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों में विचारधारा के आधार पर जजों
की नियुक्तियां हुई है। उसके बाद से न्यायपालिका की स्थिति दिनोंदिन कमजोर होती चली गई।
न्यायपालिका यदि अपने अस्तित्व को बचाए रखना चाहती है, तो वह अपनी पूर्व की परंपराओं, पूर्व
में ‎दिए गए हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट के जजों का निर्णय का अवलोकन करे। हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट
में सबसे ज्यादा मुकदमे सरकार के खिलाफ आते हैं। हर मुकदमे में केन्द्र या राज्य सरकार पार्टी
होती है। न्यायपालिका यदि सरकार के अधीन हो जाएगी, तो लोकतंत्र और संविधान को बचाये रख
पाना शायद ही संभव होगा। अंकुश रखने पर ही महावत हाथी को नियंत्रित कर पाता है। इसी तरह
से सरकार को न्यायपालिका का अंकुश पिछले 70 सालों से नियंत्रित करता रहा है।
आपातकाल, इं‎दिरा गांधी की आयोग्यता जैसे सैकड़ों ‎निर्णिय है, ‎जिसने आम आदमी का विश्वास
न्यायपा‎लिका पर बनाये रखेने का काम ‎किया था। जब सरकार के ‎नियम और उनकी मर्जी को
सरकार की तरह न्यापा‎लिका भी देखने लगेगी तो सरकार एवं प्रशासन की प्रताड़ना से बचने आम
जनता ‎किसके पास जाएगी। ‎फिर लोकत्रत्र नहीं राजतंत्र स्था‎पित होगा। सं‎विधान का यह अंकुश हट
गया, तो ‎‎फिर भगवान ही मालिक होगा।

Leave a Comment

Advertisement
What does "money" mean to you?
  • Add your answer

WPL Auction 2023 : महिला आईपीएल ऑक्शन की आ गई डेट, मुंबई में होगी खिलाड़ियों की नीलामी JAGRAN NEWS Publish Date: Thu, 02 Feb 2023 06:10 PM (IST) Updated Date: Thu, 02 Feb 2023 06:10 PM (IST) Google News Facebook twitter wp K00 महिला प्रीमीयम लीग के लिए 13 फरवरी को होगा ऑक्शन। फोटो- क्रिकेटबज WPL 2023 Auction भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को तारीख और स्थान पर निर्णय लेने में कुछ समय लिया। बीसीसीआई ने निर्णय लेने से पहले कुछ प्रमुख मुद्दों पर विचार किया। उनमें से एक शादी के कारण सुविधाजनक स्थान नहीं मिल पा रहा था। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। WPL 2023 Auction : मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में 13 फरवरी को महिला प्रीमियर लीग के लिए नीलामी की मेजबानी करेगा। बीसीसीआई के सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। फ्रेंचाइजियों के अनुरोध के बाद बीसीसीआई ने यह तारीख तय की है। बता दें कि पहली बार महिला आईपीएल का आयोजन किया जाएगा। क्रिकबज के अनुसार, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को तारीख और स्थान पर निर्णय लेने में कुछ समय लिया। बीसीसीआई ने निर्णय लेने से पहले कुछ प्रमुख मुद्दों पर विचार किया। उनमें से एक शादी के कारण सुविधाजनक स्थान नहीं मिल पा रहा था। वहीं, दूसरी तरफ महिला आईपीएल की बोली जीतने वाली कई फ्रेंचाइजियां पहले से ही कई सारे लीग में व्यस्त हैं। फ्रेंचाइजियों ने की थी डेट बढ़ाने की मांग फ्रेंचाइजियों ने बीसीसीआई से अनुरोध किया था कि ITL20 के फाइल के बाद नीलामी की तारीख रखी जाए। बीसीसीआई ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। वहीं, महिला टी20 विश्व कप को देखते हुए बीसीसआई ने महिला प्रीमियर लीग के लिए ऑक्शन 13 फरवरी को निर्धारित की है। ऑक्शन जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स में होगा ऑक्शन बता दें कि बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्थित जिओ वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर एक विशाल इमारत है, जो एक सांस्कृतिक केंद्र है, जिसमें एक साथ कई कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि बोर्ड प्रबंधक नीलामी को केंद्र में कराने का विकल्प तलाश रहे हैं। आईपीएल के एक सूत्र ने पुष्टि की है कि कन्वेंशन सेंटर में नीलामी होगी। Ranji Trophy 2023, Hanuma Vihari, Fractured Wrist Ranji Trophy : टूटे हाथ के साथ बल्लेबाजी करने पहुंचे Hanuma Vihari, फैंस ने किया सलाम; देखें वीडियो यह भी पढ़ें गौरतलब हो कि अहमदाबाद में भारत और न्यूजीलैंड के निर्णायक मुकाबले से पहले बीसीसीआई ने भारतीय अंडर 19 महिला टीम को पुरस्कार दिया था। अंडर 19 टीम ने 29 जनवरी को इंग्लैड को हराकर अंडर 19 टी20 विश्व कप का खिताब जीता है। यह भी पढ़ें- WIPL: अडानी ने 1289 करोड़ रुपये में अहमदाबाद फ्रेंचाइजी खरीदी, बीसीसीआई की 4669 करोड़ रुपये की हुई कमाई भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 168 रन से हराया। फोटो- एपी IND vs NZ 3rd T20I : भारत ने दर्ज की टी20I किक्रेट में दूसरी सबसे बड़ी जीत, न्यूजीलैंड को 168 रन से रौंदा यह भी पढ़ें यह भी पढ़ें- MS Dhoni बने पुलिस अधिकारी, फैंस बोल- रोहित शेट्टी के कॉप्स इनके आगे फीके Edited By: Umesh Kumar जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट Facebook Twitter YouTube Google News Union Budget 2023- ऑटो इंडस्ट्री की उम्मीदों पर कितना खरा उतरा यह बजट | LIVE | आपका बजट blink LIVE