17 अक्टूबर अहोई अष्टमी पर विशेष : अहोई अष्टमी एक मां का अपने बच्चों के लिए त्यौहार!

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17 अक्टूबर को है अहोई अष्टमी व्रत, जानिए शुभ मूहूर्त, पूजन विधि, कथा और  महत्त्व - WoW Bharat Ki Baat

विनीत माहेश्वरी (संवाददाता)

प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई का त्यौहार मनाया जाता है।यह त्यौहार
एक मां का अपने बच्चों के लिए सबसे बड़ा पर्व है। अहोई 17 अक्टूबर को अहोई अष्टमी मनाई जा
रही है। यह दिन अहोई देवी को समर्पित है। इस दिन वंश वृद्धि और संतान के सारे कष्ट दूर करने
के लिए मां पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। सूर्योदय के साथ यह व्रत शुरु हो जाता है, जो रात
में तारों को देखने के बाद ही पूरा होता है। कई जगह महिलाएं रात में चांद को अर्घ्य देने के बाद
व्रत को पूरा करती है।इस सप्ताह सूर्य का राशि परिवर्तन होने वाला है, सूर्य तुला राशि में प्रवेश
करेंगे, जो सूर्य की तुला संक्रांति होगी।सूर्य का तुला राशि में गोचर करने से कई राशियों पर प्रभाव
पड़ेगा। अहोई अष्टमी पर इस बार तीन शुभ योग बन रहे हैं, जिससे यह व्रत और भी शुभता प्रदान
करने वाला हो गया है।
अहोई अष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं। ये तीनों ही योग शुभ और
मांगलिक कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं।यानि इस बार की अहोई अत्यंत शुभ घड़ी में संतान सुख
प्रदान करने वाली है।जिन महिलाओं को संतान का सुख नहीं मिल रहा है। वह इस दिन अहोई मैया
और महादेव की पूजा करें। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें। अहोई देवी को सफेद पुष्प
अर्पित करें। साथ ही घर में जितने सदस्य रहते हैं। उतनी संख्या से एक ज्यादा संख्या में पौधे
लगाएं।यदि संतान के करियर में रुकावट आ रही हैं तो अहोई अष्टमी के दिन देवी मां को लाल फूल
चढ़ाएं। महादेव को खीर का भोग लगाएं। फिर वह भोग मां अपने हाथों से संतान को खिलाएं। साथ
ही लाल फूल भी संतान को दें। जब फूल सूख जाए तो इसे किसी लाल कपड़े में रख लें। नौकरी या
काम पूरा होने पर उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें।संतान के वैवाहिक जीवन में परेशानी है। या
उसकी शादी नहीं हो रही है, तो अहोई अष्टमी पर देवी अहोई को चांदी की चेन के साथ गुड़ अर्पित
करें।
पूजा के बाद चांदी की चेन संतान के गले में पहना कर उसे गुड़ का प्रसाद दें। संतान प्राप्ति के लिए
अहोई अष्टमी के दिन से 45 दिन तक भगवान श्रीगणेश को बेलपत्र चढ़ाएं। इस दिन माता अहोई
देवी की तस्वीर या प्रतिमा पर सिंदूर चढ़ाएं तथा अपनी मन्नत के लिए प्रार्थना करे।अहोई अष्टमी
पूजा का मुहूर्त 17 अक्टूबर की शाम को 5 बजकर 50 मिनट से शुरू हो रहा है, जो शाम 7 बजकर
05 मिनट तक रहेगा। पूजा मुहूर्त की अवधि लगभग 1 घंटा 15 मिनट तक है।तारों को देखने का
मुहूर्त 17 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 13 मिनट पर है। अहोई अष्टमी के दिन चांद निकलने का
समय 11 बजकर 24 मिनट पर है। तारों को देखने के बाद 6 बजकर 36 मिनट पर व्रत खोल
सकते हैं। वहीं चांद देखकर व्रत खोलने के लिए रात 11 बजकर 24 मिनट के बाद खाना खाया जा
सकता हैं।

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