आम जन की सुविधाएं, रेवड़ी बांटना जैसा नहीं!

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विनीत माहेश्वरी (संवाददाता )

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देश में जब-जब चुनाव हुये है, तब-तब चुनाव पूर्व सत्ता में आने पर सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपने घोषणा पत्र
में आम जन को पानी, बिजली, शिक्षा, राशन आदि में विभिन्न तरह की रियायत, पेंशन,रोजगार, छात्रों छात्राओं को
लैप टैप, मोबाइल, साईकिल आदि देने की बात समाहित होती पर इस तरह की घोषणाओं पर किसी को आपत्ति
नहीं हुई। पर जब से बिजली फ्री के मामले को लेकर सरकार बदलने लगी तो आम जन को चुनावी घोषणा पत्र में
दी जाने वाली सुविधाएं कुछ राजनीतिक दलों को फ्री रेवड़ी बांटने जैसी लगने लगी। सत्ता जाने का समाया भय इस
मामले को सर्वोच्य न्यायालय तक पहुंचा दिया। इस मामले पर उसका निर्णय क्या होगा? इस बारे में अभी कुछ
कहा नहीं जा सकता पर उम्मीद की जा रही है कि फैसला आम जन के हित में हीं होगा।
देश में जब-जब चुनाव होते है, आम जन को तरह-तरह की सुवधिाएं देने की बात हर राजनीतिक दल की घोषणा
पत्र में समाहित होता है जिसे फ्री रेवड़ी बांटने की प्रासंगिकता के तहत कभी नहीं माना जा सकता। जब सरकार
आम जन से टैक्स की वसूली करती है तो आम जन को राहत देने का भी दायित्व उसी का बनता है। आम जन
को राहत देने के क्रम में पानी, बिजली, आवास, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, पेंशन में रियायत देने की घोषणा करना
फ्री रेवड़ी बांटने के क्रम में कभी नहीं माना जा सकता। सरकार जब टैक्स लेती है तो सरकार से राहत लेना भी
आम जन का मौलिक अधिकार है।
देश में रहने वाले हर नागरिक की सामाजिक, आर्थिक दशा एक जैसी नहीं है। कुछ बहुत अमीर है कुछ बहुत ही
गरीब। इनके बीच समायी है देश की सर्वाधिक मध्यम वर्ग की जनता जो सर्वाधिक सरकार को टैक्स देती है पर
अपना दुखड़ा किसी से कह नहीं सकती। जो बहुत गरीब है उसे तो हर प्रकार की सुविधाएं हर सरकार देती है पर
जो मध्यमवर्गीय वेतनभोगी, किसान, आम मजदूर परिवार है जिसके कंधों पर परिवार चलाने का सर्वाधिक भार है,
जिसकी आमदनी दिन पर दिन पर बढ़ते जा रहे टैक्स के भार तले छोटी होती जा रही है,उसकी कोई चिंता नहीं

करता। जब उसे कुछ राहत मिलने की बात सामने आती है तो फ्री रेवड़ी बांटने की वकालत होने लगती है। देश का
जन नेता जो वेतन भोगी है जनतंत्र का राजा है, उसके लिये सबकुछ फ्री है, पर आम जन को जब राहत देने की
बात सामने आती है तो उसे फ्री रेवड़ी बांटने की संज्ञा दे दी जाती है।
आज देश में नई टैक्स नीति लागू होने के साथ-साथ कई प्रकार के टैक्स आम जन को चुकाने पड़ रहे है जिससे
आम जनता महंगाई के बोझ तले दबती जा रही है। जमा राशि पर दिन पर दिन घटते जा रहे व्याज दर से देश के
वरिष्ठजन अपने भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे है। इसतरह के हालात में सरकार द्वारा आम जन को दी
जाने वाली राहत को फ्री रेवड़ी बांटने की संज्ञा कदापि नहीं दी सकती।

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