रूस-यूक्रेन संघर्ष के छह महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ा

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विनीत माहेश्वरी (संवाददाता )

मेकेनहेम, 21 अगस्त  रूस-यूक्रेन युद्ध के छह महीने पूरे होने के बीच यूरोपीय देशों में रूस से
प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित होने से कई छोटी एवं मझोली कंपनियां बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं। इस
वजह से बड़ी संख्या में लोगों के बेरोजगार होने का खतरा भी पैदा हो गया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के छह महीने बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके विनाशकारी परिणाम नजर आने लगे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि तनावपूर्ण हालात में सुधार नहीं हुआ तो आगे स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
इस युद्ध की वजह से न केवल प्राकृतिक गैस बहुत अधिक महंगी हो गई है, बल्कि इसकी उपलब्धता पर भी
नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। यदि रूस पश्चिमी प्रतिबंधों का बदला लेने के लिए यूरोप को आपूर्ति पूरी तरह से बंद
कर देता है तो आने वाली सर्दियों में यूरोपीय देशों की परेशानी और भी बढ़ जाएगी।
जर्मनी की जस्ता कंपनियों के संघ के प्रमुख मार्टिन कोप ने कहा कि यदि गैस आपूर्ति में कटौती हुई तो सारे
उपकरण बेकार हो जाएंगे।
दुनिया भर में सरकारें, व्यवसाय और परिवार युद्ध के आर्थिक प्रभावों को महसूस कर रहे हैं। बढ़ती मुद्रास्फीति
और ऊर्जा लागत बढ़ने से यूरोप मंदी की कगार पर पहुंच गया है। कई यूरोपीय देशों में मुद्रास्फीति कई दशकों के
उच्च स्तर पर पहुंच गई है।
उच्च खाद्य कीमतों से विकासशील दुनिया में व्यापक भूख और अशांति पैदा हो सकती है। रूस और यूक्रेन से
उर्वरक तथा अनाज निर्यात बाधित होने से हालात खराब हो गए हैं।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने एक साल से कम समय में चौथी बार वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अपने
पूर्वानुमान को घटा दिया है।

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