नूपुर का समर्थन करने पर व्यापारी को सिर कलम की धमकी देने वाले अधिवक्ता ने किया एसएसपी के समक्ष सरें

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विनीत माहेश्वरी (संवाददाता)

गाजियाबाद, 07 जुलाई भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर व्यापारी को सिर
कलम करने की धमकी देने वाले आरोपी अधिवक्ता ने वीरवार को एसएसपी मुनिराज जी के समक्ष सरेंडर कर
दिया। स्थानीय अधिवक्ताओं के साथ पुलिस ऑफिस पहुंचे आरोपी अधिवक्ता ने एसएसपी के सामने अपने जुर्म का
इकबाल करते हुए खुद को गिरफ्तार कर लेने की बात कही। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने अपने पड़ोसी को फंसाने की नीयत से व्यापारी देवेन्द्र ढाका को स्पीड पोस्ट के
जरिए धमकी भरा पत्र भेजा था। जिसमें उदयपुर की घटना का हवाला देते हुए व्यापारी और उनके बेटे सचिन
कुमार का कन्हैया लाल की तरह ही सिर कलम करने की धमकी दी थी।
एसपी ग्रामीण डा.ईरज राजा ने बताया कि लोनी बॉर्डर थानाक्षेत्र की इंद्रापुरी कॉलोनी में रहने वाले देवेन्द्र ढाका पेशे
से व्यापारी हैं। वह भारतीय व्यापार मंडल रजि.उत्तर प्रदेश में प्रदेश मंत्री भी हैं। 4 जुलाई को देवेन्द्र ढाका ने लोनी
बॉर्डर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें उनका कहना था कि उन्हें स्पीड पोस्ट के जरिए एक धमकी भरा
पत्र मिला है। पत्र में राजस्थान के उदयपुर में हुई कन्हैया लाल की हत्या का जिक्र करते हुए उन्हें और उनके बेटे
को भी सिर कलम करने की धमकी दी गई है। पत्र में कहा गया है कि उनके द्वारा नूपुर शर्मा का समर्थन करते
हुए समुदाय विशेष के खिलाफ जो सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली जा रही हैं उसका उन्हें अंजाम भुगतना होगा।
एसपी ग्रामीण की मानें तो देवेन्द्र ढाका की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच
शुरू कर दी थी।
एसपी ग्रामीण ईरज राजा ने बताया कि पीडि़त देवेन्द्र की शिकायत दर्ज करने के बाद उन्होंने थाना पुलिस के साथ
अपनी एसओजी टीम को खुलासे के लिए लगाया था। जांच के क्रम में पुलिस द्वारा स्पीड पोस्ट के नंबर की
पड़ताल की गई। पोस्ट ऑफिस की वेबसाइट खंगालकर पता किया गया कि यह स्पीड पोस्ट किस डाकखाने से की
गई। वेबसाइट खंगालने पर पता चला कि धमकी भरा पत्र दिल्ली के शाहदरा स्थित पोस्ट ऑफिस से स्पीड पोस्ट
के जरिए भेजा गया था। एसपी ग्रामीण की मानें तो शाहदरा स्थित पोस्ट ऑफिस पहुंच कर पुलिस ने जांच.पड़ताल
की। वहां रिकॉर्ड खंगालने पर पुलिस को पता चला कि 4 जुलाई को परवेज अली नामक युवक द्वारा पांच पत्र एक
साथ स्पीड पोस्ट के लिए दिए गए थे। जिनमें से एक पत्र देवेन्द्र ढाका के नाम भी भेजा गया था। जिसके बाद
पुलिस ने लोनी निवासी परवेज अली की तलाश शुरू कर दी।
एसपी ग्रामीण का कहना है कि परवेज अली के खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद पुलिस ने उसपर शिकंजा
कसना शुरू कर दिया था। जिसकी जानकारी परवेज को भी लग गई थी। पुलिस के दबाव और गिरफ्तारी के डर से
आरोपी परवेज वीरवार को स्थानीय अधिवक्ताओं के साथ पुलिस ऑफिस पहुंच गया। वहां उसने एसएसपी मुनिराज
जी के समक्ष सरेंडर करते हुए खुद को गिरफ्तार करने की बात कही। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी परवेज को
गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि परवेज अली पेशे से अधिवक्ता है और दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में
प्रैक्टिस करता है। जिसके चलते पुलिस से बचने के लिए उसने स्थानीय अधिवक्ताओं की मदद ली।

फंसाने की नीयत से पड़ोसी का लिखा था पत्र में नाम, पुलिस ने दी क्लीन चिट
एसपी ईरज राजा की मानें तो पीडि़त देवेन्द्र ढाका के खिलाफ भी कई केस दर्ज हैं। वह लोनी बॉर्डर थाने का
हिस्ट्रीशीटर है। देवेन्द्र के केसों की पैरवी आरोपी अधिवक्ता परवेज अली करता है। जिसके चलते दोनों की पुरानी
जान पहचान है। पुलिस का कहना है कि पड़ोस में रहने वाले सदर खान से आरोपी की पुरानी रंजिश चली आ रही
है। कुछ दिन पूर्व भी उसका सदर खान से विवाद हुआ था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि रंजिश के चलते वह
सदर खान को सबक सिखाना चाहता था। इसी बीच नूपुर शर्मा के बयान पर देश भर का माहौल गरमा गया और
उदयपुर में कन्हैया लाल की गला काट कर हत्या कर दी गई। इसी माहौल का फायदा उठाकर उसने सदर खान को
फंसाने की नीयत से देवेन्द्र ढाका को धमकी भरा पत्र भेजा था। उसे उम्मीद थी कि पत्र मिलने के बाद पुलिस सदर
खान के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उसे जेल भेजेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों का कहना है कि बेशक पुलिस ने
परवेज अली को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन पुलिस पूरे प्रकरण में देवेन्द्र और परवेज की मिलीभगत की भी
जांच कर रही है।
पुलिस दफ्तर पहुंचने पर हुई गिरफ्तारी और कोर्ट पहुंचते ही मिली जमानत
व्यापारी को धमकी भरा पत्र भेजकर सामाजिक सौहार्द बिगाडऩे का प्रयास करने वाले आरोपी अधिवक्ता परवेज
अली को कोर्ट पहुंचते ही जमानत मिल गई। पुलिस का कहना है कि आरोपी को धारा 153, 153(ए) और 506 के
तहत गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था। लेकिन कोर्ट ने साक्ष्यों और पुलिस की खामियों के चलते आरोपी
को जमानत दे दी।

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